ब्रह्मांड की उत्पत्ति एवं स्वरूप, origin and nature of the universe, बिग बैंग सिद्धांत (big bang theory)

ब्रह्मांड की उत्पत्ति एवं स्वरूप, origin and nature of the universe, बिग बैंग सिद्धांत (big bang theory)

पृथ्वी हमारे सौरमंडल का अंग है सौरमंडल आकाशगंगा मंदाकिनी की मध्यवर्ती घुलनशील भुजा का एक अंश है।हमारी मंदाकिनी के तीन घुलनशील भुजाओं में असंख्य तारे और शौर्य परिवार हैं। मंदाकिनी सदृश्य कई आकाशगंगाए मिलकर एक आकाशगंगा का पुंज (सुपर क्लस्टर आफ गैलेक्सी) बनाती है। आकाशगंगा के सभी पौधों को सम्मिलित रूप से ब्रह्मांड कहते हैं।

दूसरे शब्दों में सूक्षतम अंडूओ से लेकर महाकाय आकाशगंगा तक के सम्मिलित स्वरूप को ब्रह्मांड कहा जाता है।
 ब्रह्मांड की उत्पत्ति विषयक मुख्यता चार सिद्धांत है, जिसमें प्रथम सिद्धांत सर्वाधिक प्रचलित एवं मान्यता प्राप्त है।
 1- महा विस्फोटक सिद्धांत बिग बैंग थ्योरी प्रतिपादक  ऐबे जार्ज लैमेंतर।
 2- स्फीति सिद्धांत
 3-सतत सृष्टि सिद्धांत Steady state Theory- प्रतिपादक थॉमस गोल्ड एवं हरमन बॉडी
 4- दोलन सिद्धांत Pulsating Universe Theory- प्रतिपादक डॉक्टर एलेन संडेजा

बिग बैंग सिद्धांत Big Bang Theory- 

इस सिद्धांत का प्रतिपादन 1895 में ब्रह्मांड आकाशगंगा तथा सौरमंडल की उत्पत्ति के लिए किया था। बाद में राबर्ट दे गोनेर ने 1967 में इस सिद्धांत की व्याख्या प्रस्तुत की वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर ब्रह्मांड की उत्पत्ति तथा इसके विकास को अधोलिखित प्रकार से विभूषित किया जा सकता है।
वह अवस्था जबकि संपूर्ण ब्रह्मांड एक गर्म एवं सघन बिंदु पर आज से लगभग 15 वर्ष पूर्व केंद्रित था।अत्यधिक संकेंद्रण के कारण बिंदु का आकस्मिक महा विस्फोट हुआ। जिससे ब्रह्मांड विस्फोट कॉस्मिक एक्सप्लोजन या बिगबैंग की उपमा प्रदान की गई इसके साथ ही समय समर्थन एवं वस्तु की उत्पत्ति हुई।
विस्फोट के अत्यंत समय में बिंदु विस्तृत होकर वालीबाल के आकार का हो गया जो बाद में एक आग के गोले की सदृश्य हो गया। जिसका अर्ध व्यास लगभग 10 अरब मीर्था अग्नि बाल की अवस्था के पश्चात जब ब्रह्मांड की आयु 1 सेकंड की हुई और उसका ताप कुछ कम हुआ तो मूलकडू फंडामेंटल पार्टिकल्स तथा प्रति गणों एंटीपार्टिकल्स की उत्पत्ति हुई, जो आगे चलकर परमाणु का निर्माण किए।
विस्फोट के 1 मिनट बाद ब्रह्मांड और भी विस्तृत होकर एक बड़ा ताप नाभिकीय रिएक्टर जॉइंट हारमोंस के रिएक्टर हो गया। परिणाम स्वरुप हाइड्रोजन नाभिक से इस अवस्था में हीलियम परमाणु के नाभिक बने।कुछ तो हजार वर्ष के पश्चात पदार्थों तथा विचारों का चमकीला सम्मिश्रण होकर फैल गया । कुछ अरब वर्ष पश्चात हाइड्रोजन एवं हीलियम के बादल संकुचित होकर आकाशगंगा में एवं तारों का निर्माण करने लगे सूर्य तथा अन्य तारों के संगठन का लगभग 98% भाग हाइड्रोजन तथा हीलियम का बना हुआ है। तारों का केंद्रीय भाग पदार्थ के नाभिकीय संलयन के कारण अधिक गर्म हो गया तारों से चमक निकलने लगी तथा तारों के केंद्र में भारी पदार्थ का गठन होने लगा।

बिग बैंग के लगभग 10.5 अरब वर्ष पश्चात अर्थात आज से 4.5 वर्ष पूर्व सौरमंडल का विकास हुआ जिसमें ग्रहों तथा उपग्रहों आदि का निर्माण हुआ।
आज आकाशगंगा ए सुपरक्लस्टर के रूप में पूंजी भूत है यह पूंजी भूत आकाशगंगा है एक दूसरे कुंजू से 100 से 400 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर है। इस के मध्य का स्थान काला है अपने निर्माण काल के समय से प्राप्त आवेग के कारण इस के मध्य की दूरी बढ़ती जा रही है।

विश्व के सुविख्यात भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने अपनी पुस्तक समय का संक्षिप्त इतिहास अब ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम में उद्धृत किया है। कि आज से लगभग 15 अरब वर्ष (नवीनतम खोजों के अनुसार 13.7 अरब वर्ष पूर्व) पूर्व ब्रह्मांड का अस्तित्व एक मटर के दाने के रूप में था। इसके पश्चात बिग बैंग सिद्धांत का समर्थन करते हुए वह लिखते हैं कि महा विस्फोट के पश्चात ब्रह्मांड का स्वरूप विस्तृत हुआ आज वही मटर के दाने के आकार का ब्रह्मांड असीम और अनंत है।
अमेरिकी खगोल विद एडविन हबल ने बताया कि आकाशगंगाओं के बीच की दूरी बढ़ रही है। जैसे जैसे आकाशगंगा ओं के बीच की दूरी बढ़ रही है वैसे-वैसे इनके दूर जाने की गति तेज होती जा रही है। इसकी तुलना हम एक फूलते गुब्बारे से कर सकते हैं। अगर हम एक गुब्बारे पर कुछ छोटे-छोटे बिंदु बना दें तो जैसे जैसे गुब्बारा फूलता जाएगा वैसे-वैसे यह बिंदु भी एक दूसरे से दूर होते जाएंगे। अब अगर इस बिंदु को मंदाकिनीय माल ले तो गुब्बारे यानी ब्रह्मांड के प्रसारण के साथ-साथ मंदाकिनी यों के बीच की दूरी भी बढ़ती जाएगी। इसे विज्ञान के डॉप्लर प्रभाव द्वारा भी समझा जा सकता है।

प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव Doppler effect in light.

प्रकाश स्रोत तथा प्रेक्षण की सापेक्ष गति के कारण प्रकाश की आवृत्ति अथवा तरंग दर्द में प्रेषित आभासी परिवर्तन को प्रकाशमैं डॉप्लर प्रभाव कहते हैं। प्रकाश के डॉप्लर प्रभाव से तारों अथवा गैलेक्सी ओं की गति का अनुमान लगाया जा सकता है। तारों से आने वाले प्रकाश के स्पेक्ट्रम में हाइड्रोजन हिलियम सोडियम आदि तत्वों की स्पेक्ट्रम रेखाएं पाई जाती हैं यदि कोई तारा पृथ्वी पर स्थित परीक्षण से दूर जा रहा हो। अथवा प्रेक्षण की ओर आ रहा हो तो इसके प्रकाश को स्पेक्ट्रम ही रेखाएं स्पेक्ट्रम के दीर्घ तरंगदैर्ध्य लाल अथवा लघु तरंगदैर्ध्य बैगनी भाग की पूर्व स्थापित हो जाएगी इस घटना से तारे का वेग ज्ञात किया जा सकता है। इसके लिए तारे के प्रकाश के स्पेक्ट्रम रेखाओं की प्रयोगशाला में किसी तत्व के स्पेक्ट्रम में प्राप्त की रेखाओं से तुलना करते हैं यदि तारे कि स्पेक्ट्रम ही रेखाएं स्पेक्ट्रम के तरंग दैर्ध्य लाल बाग की ओर विस्थापित है। तू तारा पृथ्वी से दूर जा रहा है और यदि यह लग तरंगदैर्ध्य बैगनी भाग की ओर विस्थापित है तो तारा पृथ्वी की ओर आ रहा है वे सभी आकाशगंगा a11 जिनके लिए डॉप्लर विस्थापन का मापन किया गया है सभी में अभी रक्त विस्थापन रेडशिफ्ट पाया जाता है। इससे स्पष्ट है कि सभी आकाशगंगा में पृथ्वी से दूर जा रही हैं यह तथ्य स्पष्ट करता है कि विश्वकप प्रसार एक्सप्रेशन ऑफ द यूनिवर्स हो रहा है इस प्रकार इस प्रकार यदि हम कालक्रम से पीछे देखें तो यह आकाशगंगा है। आज ही की अपेक्षा आपस में पास पास थी तथा लगभग 15 वर्ष पूर्व समूचे ब्रह्मांड की सभी आकाशगंगाओं का पदार्थ एक बिंदु पर था जिसे वैज्ञानिक विलक्षणता का बिंदु पॉइंट ऑफ सिंगुलेरिटी कहते हैं। जिसके विस्फोट से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई इस विस्फोट को बिग बैंग कहा जाता है।


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